वैश्विक जल स्तर में वृद्धि हुई दुगुनी, बज रही खतरे की घंटी

जेनेवा : वैश्विक स्तर पर जलस्तर बढ़ने की दर दोगुनी हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने यह चेतावनी दी है। 1993 से 2002 के बीच जल स्तर 2012 से 2022 के मुकाबले दोगुनी तेजी से बढ़ा है। पिछले साल यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि इस सदी के अंत तक जल स्तर में वृद्धि की दर वर्तमान स्तर या इससे भी अधिक तक बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि इसका कारण बढ़ता तापमान है। 

तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघल रहे हैं। 2013 से 2022 के बीच समुद्र का स्तर 4.62 किमी की दर से बढ़ा है। यह 1993 से 2022 तक दोगुना हो गया है। 

डब्ल्यूपीएमओ के महासचिव तालुस ने कहा है कि पिघलते ग्लेशियर और समुद्र का बढ़ता स्तर बेहद खतरनाक है। यह बहुत ही खतरनाक प्रक्रिया है। इसके कारण अधिक मात्रा में ग्रीन हाउस गैस निकलती है। जल स्तर में वृद्धि की घटना इस सदी के अंत तक जारी रहेगी। उसके बाद भी आने वाले हजारों वर्षों तक समुद्र का स्तर बढ़ता रहेगा। 

इससे कई द्वीप धरती के नक्शे से गायब हो जाएंगे। अंटार्कटिका की बर्फ पिछले साल जून-जुलाई में तेजी से पिघली थी। समुद्र की गर्मी की लहरें भूमि की तुलना में 58 प्रतिशत अधिक थीं। इससे ध्रुवीय क्षेत्र में भी बर्फ तेजी से पिघल रही है। 

तालुस ने कहा कि इस प्रकार की खराब मौसम की स्थिति 2060 तक बनी रहेगी। अगर कार्बन कम नहीं हुआ तो स्थिति और खराब होने वाली है। हालांकि, अगली पीढ़ी की स्थिति में सुधार के लिए इसे वर्तमान में सुधारा जा सकता है। उन्हें कष्ट नहीं उठाना चाहिए। 

अगले दशक में तापमान में डेढ़ डिग्री की वृद्धि का मतलब है कि परेशानी होना तय है। जलवायु में इतना बदलाव आएगा कि कई देशों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। 

WMO ने कहा कि 2022 कुल मिलाकर पांचवां या छठा सबसे गर्म साल था। पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में वैश्विक तापमान 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक था।