लखीमपुर हिंसा: एसआईटी ने दूसरी प्राथमिकी के संबंध में 4 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया

लखीमपुर खीरी (उप्र): विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दूसरी प्राथमिकी के संबंध में शुक्रवार को आरोप पत्र दाखिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एस पी यादव ने बताया, ‘‘एसआईटी ने प्राथमिकी संख्या 220/2021 के संबंध में शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) मोना सिंह की अदालत में चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।’’ प्राथमिकी संख्या 220 के तहत गिरफ्तार किए गए 7 आरोपियों में से पुलिस ने 4 आरोपियों विचित्र सिंह, गुरविंदर सिंह, कमलजीत सिंह और गुरप्रीत सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किये हैं।

यादव ने बताया, ‘‘तीन व्यक्तियों रणजीत सिंह, सोनू उर्फ कंवलजीत सिंह और अवतार सिंह के संबंध में अंतिम रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 169 (सबूत की कमी होने पर आरोपी की रिहाई) के तहत प्रस्तुत की गई है और उनकी रिहाई के आदेश जारी किए जा रहे हैं।’’ एसपीओ ने बताया, ‘‘जिन चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया, उनमें विचित्र सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 109, 114, 426, 436 और 506 शामिल हैं। जबकि, गुरविंदर सिंह, कमलजीत सिंह और गुरप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 143, 147, 148, 149, 323, 325, 427,436, 504 और 302 शामिल हैं।’’

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में तीन अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा में चार किसानों, एक पत्रकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं और एक ड्राइवर सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी। मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पहली प्राथमिकी एक किसान द्वारा दर्ज कराई गई थी जिसमें गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और 15-20 अन्य पर चार किसानों और एक पत्रकार को कुचलने का आरोप लगाया गया था।

हिंसा की जांच के लिए गठित एसआईटी ने आशीष मिश्रा, सुमित जायसवाल, अंकित दास और 11 अन्य के खिलाफ आईपीसी, शस्त्र कानून की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी संख्या-219 के संबंध में तीन जनवरी को आरोप पत्र दाखिल किया था। दूसरी प्राथमिकी दो भाजपा कार्यकर्ताओं और एक ड्राइवर की हत्या के मामले में सुमित जायसवाल ने दर्ज कराई थी। प्राथमिकी संख्या-220 के संबंध में जांच करते हुए एसआईटी ने सात लोगों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया। हालांकि, शुक्रवार को आरोप पत्र दाखिल करते समय केवल चार लोगों को ही आरोपी बनाया गया।