पाकिस्‍तानी जनता पर एक और बोझ, महंगाई से दोगुना हुआ दवाओं का दाम 20 फीसदी तक बढ़ा

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में सरकार ने गरीब जनता पर महंगाई का एक और बम फोड़ा है. 

पाकिस्तान में दवाओं की कीमत में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। मूल्य वृद्धि की दवा निर्माताओं द्वारा आलोचना की गई है क्योंकि उन्होंने सरकार से 39 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की मांग की थी, लेकिन सरकार ने केवल 20 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की अनुमति दी है। 

रेट बनाने वालों का कहना था कि अगर कीमत 39 फीसदी तक नहीं बढ़ाई गई तो दवा उद्योग तबाह हो जाएगा। क्‍योंकि पाकिस्‍तानी रुपए के कमजोर होने के बाद दवा बनाने के लिए इंपोर्टेड मैटेरियल के दाम बढ़ गए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से आयात में दिक्कत आ रही है। 

पाकिस्तान में आर्थिक संकट का स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। देश में हृदय, कैंसर और गुर्दे की बीमारियों से संबंधित दवाओं की कमी है, वहीं मधुमेह के लिए इंसुलिन की भी कमी है। 

पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ समय से दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी पर ब्रेक लगा रही थी। शाहबाज शरीफ सरकार को डर था कि चुनाव से पहले कीमतों में बढ़ोतरी से जनता में गुस्सा फैल जाएगा। हालांकि, दवा कंपनियों के लगातार दबाव के बाद सरकार के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। 

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अगर पाकिस्तानी रुपया मजबूत होता है तो तीन महीने बाद दवाओं के दाम की समीक्षा की जाएगी.