जेलों में कैदियों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव मामले में 11 राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली, 03 जनवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में कैदियों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव और काम का विभाजन रोकने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और 11 राज्यों को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ये एक गंभीर मामला है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार, एकेडमी ऑफ प्रिजंस एंड करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन, यूपी, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, ओडिशा, झारखंड, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र को नोटिस जारी किया है।

पत्रकार सुकन्या शांता ने याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील एस मुरलीधर ने कोर्ट से कहा कि ऐसे मामले हैं जहां दलितों और दूसरी जातियों के लिए अलग जेल है। उन्होंने कहा कि ऐसा भेदभाव कैदियों के जेल में जाते शुरू हो जाता है।

सुनवाई के दौरान जब चीफ जस्टिस ने कहा कि ये गंभीर मसला है तब केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये स्वीकार्य नहीं है, हम इसे देखेंगे। याचिका में कहा गया है कि प्रिजन मैनुअल और प्रिजन रुल्स में भी कई सारे प्रावधान ऐसे हैं जो संविधान की धारा 14, 15, 17 और 23 का उल्लंघन करते हैं।