जानिये कब है महाशिवरात्रि और पूजा की विधि

मुंबई:  महा शिवरात्रि 2022 ( महा शिवरात्रि 2022 ) हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव की आराधना करके मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल महाशिवरात्रि 1 मार्च को मनाई जाएगी। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती ( महाशिवरात्रि 2022) का विवाह महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। महाशिवरात्रि के विशेष अवसर पर भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। माता पार्वती की तरह लड़कियां भी मनचाही चीज पाने के लिए व्रत रखती हैं और सभी नियमों का पालन कर उनकी पूजा करती हैं। यह भी माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

इसके अलावा ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी संकटों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव के साथ पार्वती की भी पूजा की जाती है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की उचित विधि।

शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष महाशिवरात्रि का शुभ दिन 1 मार्च मंगलवार को प्रातः 3.16 बजे से प्रारंभ होगा। चौदहवीं तिथि बुधवार 2 मार्च को प्रातः 10 बजे समाप्त होगी। महाशिवरात्रि की पूजा चार चरणों में की जाती है। पूजा के लिए चार शुभ मुहूर्त होते हैं।

प्रथम चरण में पूजा- 1 मार्च शाम 6.21 बजे से रात 9.27 बजे तक

पूजा का दूसरा चरण – 1 मार्च रात 9.27 बजे से दोपहर 12.33 बजे तक

पूजा का तीसरा चरण – 2 मार्च दोपहर 12.33 बजे से 3.39 बजे तक।

पूजा का चौथा चरण – 2 मार्च को सुबह 3.39 बजे से 6.45 बजे तक

शिवरात्रि पूजा विधि

फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि को वर्ष की सबसे बड़ी शिवरात्रि माना जाता है। दिन की शुरुआत दिव्य क्षण में स्नान करके करें। इसके बाद घर में पूजा स्थल पर जल से भरा कलश रखें। फिर कलश में शिव और माता पार्वती की मूर्तियों को स्थापित करें।

भगवान शिव और माता पार्वती को अक्षत, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, लौंग, इलायची, दूध, दही, शहद, घी, धतूरा, बेलपत्र, कमलगट्टा और फल चढ़ाएं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें और अंत में आरती करें।

शिवरात्रीची पूजा मंत्र

इस दिन लोग महामृत्युंजय और शिव मंत्र का पाठ करते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र – ओम त्रयंबकाम्यजमाहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्। उपजाऊ बंधन।

शिव मंत्र – ओम नमः शिवाय