केंद्रीय बजट 2022: सहकारी समितियों पर कर घटा

नई दिल्ली, 1 फरवरी | केंद्र सरकार ने सहकारी समितियों तथा कंपनियों के बीच समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों के लिए वैकल्पिक न्यूनतम कर दर को वर्तमान 18.5 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में 2022-23 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसी सहकारी समितियों पर अधिभार (सरचार्ज), जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपये से अधिक तथा 10 करोड़ रुपये तक है, वर्तमान में 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि इससे सहकारी समितियों तथा इसके सदस्यों, जो अधिकांशत: ग्रामीण तथा कृषक समुदायों से हैं, की आय को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि स्टार्टअप्स हमारी अर्थव्यवस्था के लिए विकास के प्रेरक के रूप में उभरकर सामने आए हैं और कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी सहायता करने के लिए सरकार ने पात्र स्टार्टअप के निगमन की अवधि और एक वर्ष यानी 31 मार्च 2023 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे कि उन्हें निगमन से 10 वर्षों में से क्रमिक तीन वर्षों के लिए कर प्रोत्साहन दिया जा सके। 31 मार्च 2022के लिए स्थापित पात्र स्टार्टअप्स को पहले यह सुविधा उपलब्ध थी।

सीतारमण ने कहा कि कुछ घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी कारोबारी परिवेश कायम करने के लिए हमारी सरकार द्वारा नवनिर्मित घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत कर की रियायती कर व्यवस्था लागू की गई थी। सरकार धारा 115बीएबी के अंतर्गत विनिर्माण या उत्पादन के आरंभ करने की तिथि को एक वर्ष यानी 31 मार्च 2023 से 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखती है।

यह देखा गया है कि कारोबार को बढ़ावा देने की कार्यनीति के रूप में कारोबारी प्रतिष्ठानों में अपने एजेंटों को हित लाभ देने की प्रवृत्ति होती है। ऐसे हित लाभ एजेंटों के हाथों में कर योग्य होते हैं। सीतारमण ने कहा, “ऐसे लेन-देन को ट्रैक करने के लिए सरकार हितलाभ देने वाले व्यक्ति द्वारा कर कटौती के लिए उपबंध करने का प्रस्ताव करती हूं, बशर्त वित्त वर्ष के दौरान ऐसे हितलाभों का कुल मूल्य 20,000 रुपये से अधिक न हो।”

वित्त मंत्री ने कहा कि ‘स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर’ विनिर्दिष्ट शासकीय कल्याणकारी कार्यक्रमों के निधियन के लिए करदाता पर एक अतिरिक्त अधिभार के रूप में अधिरोपित किया जाता है। परंतु, कुछ न्यायालयों ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर को कारोबारी व्यय के रूप में स्वीकृत किया है, जो विधायी अभिप्राय के विरूद्ध है। विधायी अभिप्राय दोहराने के लिए मैं यह स्पष्ट करने का प्रस्ताव करती हूं कि आय और मुनाफे पर किसी भी अधिभार या उपकर को कारोबारी व्यय के रूप में स्वीकृत नहीं किया जा सकता है।

सीतारमण ने घोषणा की कि वर्तमान में, तलाशी कार्रवाइयों में पता लगे अप्रकट आय के संबंध में हानि को आगे ले जाकर समंजित करने के संबंध में अस्पष्टता है।

मंत्री ने आगे कहा, “यह पाया गया है कि अनेक मामलों में, जिनमें अप्रकट आमदनी या बिक्री को छिपाने आदि का पता लगता है तो हानि के प्रति समंजन करके कर के भुगतान से बचा जाता है। निश्चितता लाने और कर-वंचकों में निवारक भय बढ़ाने के लिए मैं यह उपबंध करने का प्रस्ताव करती हूं कि तलाशी एवं सर्वेक्षपण कार्रवाइयों के दौरान पता लगे अप्रकट आय के संबंध में किसी भी प्रकार की हानि के प्रति समंजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।”