एडेनोवायरस वायरस का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन उसके मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल के बाद अब बेंगलुरु में भी जानकारी सामने आई है कि दो साल की बच्ची का एडेनोवायरस की वजह से लीवर-किडनी डैमेज हो गया है. राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों के चिल्ड्रेन वार्ड में सांस लेने में दिक्कत वाले बच्चों को भर्ती कराया जा रहा है. एडेनोवायरस वाले बच्चों में एक चीज जो बहुत आम है वह है सांस की तकलीफ। यह वायरस ज्यादातर 6 महीने से 2 साल तक के बच्चों को प्रभावित करता है। अब यह वायरस बच्चों के लिवर-किडनी को नुकसान पहुंचा रहा है।

एडेनोवायरस क्या है?

रिपोर्ट के मुताबिक एडेनोवायरस एक तरह का वायरस है जो धीरे-धीरे आपके शरीर को बीमार बनाता है और बाद में यही संक्रमण अपना खतरनाक रूप ले लेता है। एडेनोवायरस वाले बच्चों को सांस लेने में अधिक कठिनाई होती है।

एडेनोवायरस के लक्षण

एडेनोवायरस के लक्षण बहुत आम हैं। जो अन्य वायरल संक्रमणों की तुलना में हल्का होता है। एडेनोवायरस से संक्रमित लोगों का परीक्षण करने के बाद ही आप जान सकते हैं कि उनके पास एडेनोवायरस है। यह आमतौर पर सर्दियों की शुरुआत में शुरू होता है और वसंत ऋतु में चरम पर होता है लेकिन इस साल गर्मियों में भी इसका प्रकोप नहीं रुक रहा है।

एडेनोवायरस से कौन संक्रमित हो सकता है?

एडेनोवायरस बच्चों या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। लेकिन। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में यह बहुत आम है। एडेनोवायरस अक्सर नवजात शिशुओं में फैल सकता है। यह वायरस एक बच्चे से दूसरे बच्चे में भी फैलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों के मुंह में चीजें डालने से भी वायरस फैल सकता है।

एडेनोवायरस से लड़ने के लिए ईसीएमओ मशीनें

एडेनोवायरस रोगियों के लिए ईसीएमओ मशीनों का उपयोग किया गया था। अन्य तीव्र श्वसन बीमारी वाले मरीजों के इलाज में सहायक थे। ईसीएमओ (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) डॉ. दीपांजन चटर्जी ने कहा कि यह मशीन एडेनोवायरस से संक्रमित और इस साल की शुरुआत में अस्पताल में इलाज करा रहे कई मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हुई है।