आज टाटा ग्रुप को वापस मिल जाएगी एयर इंडिया, विनिवेश के तहत सरकार करेगी हस्तांतरण

नई दिल्ली, 27 जनवरी । भारतीय उड्डयन क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी एयर इंडिया आज टाटा ग्रुप का हिस्सा बन जाएगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एयर इंडिया को आज निजी क्षेत्र के टाटा ग्रुप के हाथ सौंपे जाने के साथ ही इस कंपनी की विनिवेश प्रक्रिया का समापन हो जाएगा। इस संबंध में एयर इंडिया के वित्त निदेशक विनोद हेजमादी ने कंपनी के कर्मचारियों को एक आधिकारिक मेल भेजकर एयर इंडिया के हस्तांतरण की पुष्टि की है।

टाटा ग्रुप के पास पहले से ही दो एयरलाइन कंपनियां मौजूद हैं। विस्तारा एयरलाइंस और एयर एशिया इंडिया एयरलाइंस में टाटा ग्रुप की बहुमत वाली हिस्सेदारी है। इन दोनों कंपनियों में बहुमत वाली हिस्सेदारी के साथ ही आज के बाद टाटा ग्रुप के पास एयर इंडिया के रूप में भारतीय उड्डयन क्षेत्र की तीसरी कंपनी भी आ जाएगी।

टाटा ग्रुप ने एक प्रतिस्पर्द्धी बोली प्रक्रिया के बाद 8 अक्टूबर 2021 को सरकार से 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया को खरीदना तय किया था। इसके बाद 11 अक्टूबर को टाटा ग्रुप में एक लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी करके एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की सरकार की इच्छा की पुष्टि करते हुए इस हिस्सेदारी को खरीदने की बात स्पष्ट की गई थी।

भारत सरकार और टाटा ग्रुप के बीच हुए इस सौदे के मुताबिक सरकार एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ ही ग्राउंड हैंडलिंग आर्म एयर इंडिया एसएटीएस की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी भी टाटा ग्रुप को सौंप देगी। खरीद प्रक्रिया की पुष्टि हो जाने के बाद 25 अक्टूबर 2021 को एयर इंडिया की बिक्री के लिए टाटा ग्रुप ने सरकार के साथ खरीद का समझौता किया था। बताया जा रहा है कि इस समझौते के तहत टाटा ग्रुप सरकार को 2,700 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। इसके साथ ही एयर इंडिया पर बकाये 15,300 करोड़ रुपये के कर्ज की देनदारी भी लेगी।

आपको बता दें कि इंडिया की शुरुआत 1932 में उद्योगपति जेआरडी टाटा ने टाटा एयरलाइंस के नाम से की थी। इस एयरलाइन की पहली कॉमर्शियल उड़ान 15 अक्टूबर 1932 को हुई थी। हालांकि इस उड़ान में कोई मुसाफिर नहीं था, बल्कि ब्रिटिश सरकार की लंदन से कराची आई 25 किलो चिट्ठियों के गट्ठर को कराची से मुंबई पहुंचाया गया था। 1933 में टाटा एयरलाइंस ने मुसाफिरों के साथ कॉमर्शियल उड़ान सेवा की शुरुआत की थी।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद इस एयरलाइन का नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। आजादी के बाद भारत सरकार ने इसमें 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी ले ली। इसके 6 साल बाद 1953 में केंद्र सरकार ने एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास करके इसके राष्ट्रीयकरण का रास्ता साफ कर दिया। इस तरह टाटा ग्रुप की कंपनी पूरी तरह से सरकारी कंपनी के रूप में तब्दील हो गई। लेकिन अब विनिवेश प्रक्रिया के तहत एक बार फिर एयर इंडया वापस टाटा ग्रुप के पास आ गई है।