अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ी खबर

श्री अमरनाथ जी की यात्रा न केवल तीर्थ है, बल्कि कश्मीर के सैकड़ों परिवारों के हजारों लोगों के जीवन के लिए संसाधन जुटाने का साधन भी है. यह उन युवा छात्रों के भविष्य में भी सुधार करता है जिनके माता-पिता गरीबी के कारण उनकी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे युवा अमरनाथ तीर्थयात्रियों का सामान एक स्टेज से दूसरे स्टेज तक पहुंचाकर, लाठी और अन्य सामान बेचकर अपनी पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। कई युवाओं को घोड़ों पर सवार होकर यात्रियों को उनके गंतव्य तक ले जाते हुए भी देखा जा सकता है। कश्मीर में इन दिनों छुट्टियां चल रही हैं. इसलिए उन्हें अपनी शिक्षा के लिए धन इकट्ठा करने का भी अवसर मिला है।

पहलगाम यात्रा मार्ग स्थित नुनवान आधार शिविर से जैसे ही तीर्थयात्री वाहनों में सवार होकर चंदनबाड़ी पहुंचते हैं, वहां सामान ढोते युवक आसानी से देखे जा सकते हैं. तीर्थयात्रियों का सामान शेषनाग पहुंचाने के लिए वे 400 से 500 रुपये लेते हैं। यहां कुछ बच्चे भी देखे जा सकते हैं जो 20 रुपये प्रति लाठी बेच रहे हैं। तीर्थयात्रियों को चढ़ाई के दौरान सहारे के लिए इन लाठी की जरूरत होती है।

पहलगाम के एक सरकारी कॉलेज में ग्रेजुएशन के तृतीय वर्ष के छात्र अरशद खान ने कहा कि उन्होंने 80,000 का घोड़ा खरीदा है। उनके बड़े भाई इस घोड़े पर सवार पर्यटकों को पहलगाम में ले जाते हैं लेकिन बाबा अमरनाथ यात्रा में वे तीर्थयात्रियों को चंदनबाड़ी से भवन और भवन से चंदनबाड़ी ले जाते हैं। ट्रिप खत्म होने के बाद फिर से कॉलेज जाना शुरू कर देंगे। इस बीच वह अपनी पढ़ाई और घर का खर्चा चलाएंगे। जुबेर और जुनैद दोनों भाई हैं जो पहलगाम के सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं। वे यात्रियों का बैग लेकर शेषनाग तक जाते हैं। लाठी भी बेचते हैं। उनका कहना है कि स्कूल बंद हैं और वे यहां से कुछ रुपये कमाकर घर देंगे. वे यहां पहली बार काम कर रहे हैं।

 

शिविरों में लगे टेंट भी स्थानीय लोगों के हैं

घुड़सवार से लेकर पालकी चलाने वाले तक सभी दुकानदार स्थानीय हैं। स्थानीय लोगों द्वारा टेंट भी लगाए गए हैं। टेंट में एक दिन रहने के लिए 450 रुपये तक चार्ज किए जाते हैं। यह यात्रा सभी लोगों के लिए रोजगार का जरिया है।